स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमों को दे रहा है बढ़ावा

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नई दिल्ली: स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (एसवीईपी), दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 2016 से एक उप-योजना के रूप में लागू किया गया है। इसका उद्देश्‍य ग्रामीणों को गरीबी से बाहर निकालना,उनकी उद्यम स्‍थापना में मदद करना और उद्यमों के स्थिर होने तक सहायता उपलब्‍ध करानाहै। एसवीईपी उद्यमों को प्रोत्‍साहन देने के लिए वित्‍तीय सहायता और व्यवसाय प्रबंधन में प्रशिक्षण और स्‍थानीय सामुदायिक कैडर बनाते समय स्‍व-रोजगार अवसरों को उपलबध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है।

कोविड महामारी की प्रतिक्रिया

जैसा कि देश ने कोरोना वायरस महामारी (कोविड-19) का मुकाबला कर रहा है। डीएवाई-एनआरएलएम के महिला, स्‍वयं सहायता समूहों ने प्रभावी अग्रिम पंक्ति के उत्तरदाताओं के रूप में कदम रखा और ग्रामीण समुदायों तथा सबसे कमजोर जनसंख्‍या के लिए तत्काल सहायता सुनिश्चित करने के लिए अंतिम कड़ी तक पहुंच गई। इन एसएचजी महिलाओं ने स्थिति की जिम्मेदारियों को निभाया और ये देश में मास्क, सुरक्षात्मक गियर किट, सैनिटाइजर और हैंडवॉश जैसे कई गुणवत्तायुक्‍त उत्पादों के निर्माण में मजबूत कार्य बल के रूप में उभरीं। स्थानीय प्रशासन ने विभिन्न हितधारकों के लिए उत्पादों की खरीद और वितरण कार्य किया। जरूरत के अनुसारइन एसएचजी ग्रामीण महिला उद्यमियों ने स्‍वयं का एक उदाहरण स्थापित किया और एक अतिरिक्त आय भी अर्जित की।

14 अगस्त, 2020 के अनुसार लगभग 3,18,413 एसएचजी सदस्य, फेस मास्क, सुरक्षात्मक किट और सैनिटाइजिंग उत्पादों के निर्माण में लगे हुए हैं। 29 राज्यों में महिला एसएचजी सदस्यों ने लगभग 23.07 करोड़ फेस मास्क, 1.02 लाख लीटर हैंडवाश और 4.79 लाख लीटर से अधिक सैनिटाइज़र का उत्पादन किया है, जिसके कारण अनुमानित व्‍यापार 903 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि देश के अधिकांश व्यवसायों का कार्य लॉकडाउन के दौरान रुक पड़ा था। इन ग्रामीण महिलाओं ने लगभग 29,000 रुपये प्रत्‍येक की अतिरिक्त आय अर्जित की।

इन महिला, एसएचजी द्वारा तैयार किए गए फेस मास्क कोविड-19 लॉकडाउन अवधि के दौरान सबसे सफल उत्पाद रहा,जिसमें 2.96 लाख एसएचजी सदस्य (59 हजार एसएचजी) शामिल हैं, जिन्होंने लगभग 150 दिनों में 23.37 करोड़ फेस मास्क का उत्पादन किया और लगभग 357 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यापार किया। इनके उत्‍पाद सरकारी खरीद के द्वारा जनता तक आपूर्ति किए जा रहे हैं। ।

कुछ महिला एसएचजी सामुदायिक रसोई को चलाने में शामिल थीं और उन्‍होंने जो 5.72 करोड़ से अधिक कमजोर समुदाय के सदस्यों के लिए पकाया हुआ खाना उपलब्‍ध कराया।

कुछ राज्यों की महिला उद्यमियों द्वारा की जाने वाली पहल इस प्रकार है :

सुश्री शारदा देवी: बिहार
बोधगया ब्लॉक के अटिया पंचायत के खाजावती गांव के दिलीप कुमार ने एक उद्य‍मीके रूप में रेडीमेड कपड़े (बच्चों के कपड़े, पजामा आदि) का व्यवसाय 2018 में शुरू किया। उनकी पत्नी सुश्री शारदा देवी, एकता क्लब सीएलएफ के तहत आनंद गांवसंगठन राम एसएचजी की एक सदस्य हैं।  श्री शारदा देवी उस समय समाचारों में आई, जब उन्‍होंने केवल 30 दिनों में 18,565 मास्क बनाने का रिकॉर्ड स्‍थापित किया। यह उत्पादन इसलिए संभव हुआ, क्योंकि उसने बीआरसी (एसवीईपी), बोधगया से 50,000 रुपये के वित्‍तीय सहायता से एक विशेष सिलाई मशीन सेट (सहायक इकाइयों के साथ) खरीदने में सफलता प्राप्‍त की। 60,000 रुपये का एक अन्‍य ऋण दिलीप को प्राप्‍त हुआ और उसकी व्‍यवसाय की अपनी इक्विटी 1.28 लाख रुपये थी।

उनके मास्‍क जिला प्रशासन और अन्‍य सरकारी विभागों को अपेक्षाकृत अधिक कीमत पर बेचे गए। केवल 30 दिनों में बिक्री का आंकड़ा 3.71 लाख रुपये तक पहुंच गया, जिसमें से शारदा देवी ने कम से कम 1.68 लाख रुपये का मार्जिन कमाया। व्‍यावसायिक आपदा के समय उसकी सहायता के लिए आगे आने के लिए बीआरसी, बोधगया टीम की आभारी है। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए उसका कारोबार6.50 लाख रुपये रहा है और उसने वित्त वर्ष 2018-19 में 1.80 लाख रुपये का लाभ कमाया था।

सुश्री भाग्यश्री लोंढे: महाराष्ट्र
सुश्री भाग्यश्री लोंढे, 2014 में जहानपुर गांव, बरशी तालुका में जिजाऊ एसएचजी में शामिल हुईं, जहां उन्हें विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर भाग लेने, जानने और चर्चा करने का अवसर मिला। भाग्यश्री ने सखी महिला ग्राम संघ (वीओ) का गठन किया, जिससे उन्हें उच्चतर प्रशिक्षण प्राप्त करने में मदद की। शुरुआत में उन्‍होंने जीजावा मसाला, पापड़ और अचार जैसे छोटे व्यवसाय को शुरू दिया।

भाग्यश्री को मई, 2016 में एसवीईपी बीआरसी बारसी से सीईएफ के रूप में 45,000 रुपये का ऋण प्राप्‍त हुआ और उसने स्थानीय रूप से उपलब्ध जैविक कच्चे माल का इस्तेमाल किया, ताकि एक तरफ जहां उत्पादन की लागत को कम किया जा सके, तो दूसरी ओर ग्राहकों को स्थानीय स्वाद भी उपलब्‍ध हो सके। उन्होंने महालक्ष्मी सरस 2019-2020, मुंबई में भाग लिया जहां उन्होंने केवल 10 दिनों में ही 5 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया और डेढ़ लाख रुपये का लाभ कमाया।

वह यही नहीं रुकी, बल्कि अपने व्यवसाय को बढ़ाने और आसपास के शहरों में अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (एजीईवाई यह डीएवाई-एनआरएलएमकी उप-योजना है, गांव से नजदीकी शहरों को ग्रामीण जुड़ाव के लिए प्रोत्‍साहित करती है) के तहत एक वाहन प्राप्‍त किया। इससे उसकी परिचालन में वृद्धि हुई और यूनिट ने 60 किलोग्राम मसाला और 300 पैकेट अचार प्रति दिन का उत्पादन शुरू किया। इससे उसे प्रति माह 45,000 रुपये का रिटर्न प्राप्‍त हुआ। कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन में भी उसने किसानों से ग्राहकों को उनके घर तक सीधे सब्जियां और अन्य किराने का सामान बेचा।
अपने व्यवसाय को चलाने के लिए भाग्यश्री ने यशवंत राव महाराष्ट्र ओपन विश्वविद्यालय से 10वीं कक्षा की परीक्षा पास की और उससे यूएमईडी-डीएवाई-एनआरएलएम के बारे में जानकारी प्राप्‍त हुई। उसे एनआरएलएम से कृषि सखी,व्यवसाय विकास प्रशिक्षण आदि के रूप में विभिन्न प्रशिक्षण प्राप्त हुआ और उसने कृषि विज्ञान केंद्र सोलापुर से फ़ॉस्टैक प्रशिक्षण प्राप्त किया। भाग्यश्री ने उद्यमी के रूप में व्यवसाय करने की कला सीखी है और उसने अपने उद्यम में अधिक महिला श्रमिकों को लगाया और नए उत्पादों शुरू करने, अधिक से अधिक मशीनें खरीदने, अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए नए बाजार के रास्ते खोजने की योजना बना रही हैं।

सुश्री पूनम: उत्तर प्रदेश
बहुत विनम्र स्‍वभाव की सुश्री पूनम ने उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद ब्लॉक से“सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सीआरपी-ईपी” का खिताब हासिल करने के लिए अपनी वित्तीय समस्याओं और सामाजिक वर्जनाओं को पार करने के लिए अपने कदम आगे बढ़ाये। उसने एसएचसजी सदस्य के रूप में अपनी यात्रा शुरू की और आत्‍मनिर्भर बनने की उनकी इच्छा और मदद ने दूसरों को भी एसवीईपी के तहत सीआरपी-ईपी के रूप में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। बी.एड पूरा करने के बाद एक निजी स्कूल के शिक्षक के साथ उनकी शादी हुई। शादी के बाद वह केवल घर के कामों तक ही सीमित रही, लेकिन वह एसएचजी में शामिल होने और बाहर जाने का प्रबंध होने से उसका दृष्टिकोण को बदल गया और उसे आत्‍मनिर्भर बनने का अवसर मिला। एसएचजी की समूह सखी ने पूनम को एसवीईपी कार्यक्रम से परिचित कराया और एक उद्यमी बनने की तरफ उसका ध्‍यान आकर्षित किया। परीक्षा पास करने के बाद उसने 54 दिनका कठोर प्रशिक्षण प्राप्‍त किया, जहाँ उसने उद्यम संवर्धन के बारे में विस्तार से सीखा।

पूनम बताती हैं:
“मैं शिक्षित होने के बाद भी बहुत कुछ नहीं कर पाई। लेकिन एसवीईपी के कारण, मैं आज आत्‍मनिर्भर हूं और अपनी आजीविका अर्जित करने के साथ-साथ मैं नए व्यवसाय शुरू करने के लिए दूसरों को मदद कर रही हूं, जिससे मुझे असीम संतुष्टि मिलती है।” वह व्यावसायिक योजनाओं, मासिक परामर्श, क्रेडिट और मार्केट लिंकेज के साथ लगभग 40 उद्यमों का मदद करती है। उनके समर्पण और सीखने के उत्साह ने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने में सफलता मिली है।

एसवीईपी में बाजार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है: हरियाणा
पूरे ग्रामीण भारत में स्थानीय मार्किट/हाट/सप्ताह में एक या दो बार संचालित होता है। यह बाजार एक आर्थिक मंच के रूप में कार्य करता है, जहां कृषि उत्पाद, अनाज, सब्जियां, फल, जड़ी बूटी, कुक्कुट तथाआवश्यक वस्तुएं जैसे किराने का सामान, फैंसी आइटम, कपड़े, बर्तन, जूते, मसाले आदि का कारोबार किया जाता है। एक विशिष्ट ग्रामीण हाट ज्यादातर स्वदेशी, लचीला और बहुस्तरीय संरचना है जो विभिन्न प्रकृति की आर्थिक गतिविधियों को समायोजित करता है।हरियाणा के राज्य मिशन ने स्थानीय उद्यमियों के उत्पादों के बाजार के लिए पिंजौर और घरौंडा के एसवीईपी ब्लॉकों में स्थानीय हाट स्थापित किए हैं। स्थानीय और पंचायत के साथ जिला और ब्लॉक इकाइयों ने इन बाजारों को स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने के बारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इन स्थानीय बाजारों की स्थापना ने एसवीईपी उद्यमियों को मांग आधारित उत्पादन लेने, अपने उद्यम का विज्ञापन करने और आय के अवसरों को बढ़ाने के बारे में प्रेरित किया है। दोनों ब्लॉकों में, ये बाजार नए उत्पादों जैसे हस्तशिल्प, घर से बने अचार, मसाला पाउडर, जूट और ऊनी उत्पादों की शुरूआत करने में बहुत प्रभावी रहे हैं। हरियाणा के इन 2 ब्लॉक में स्थापित 8 ग्रामीण बाजारों में लगभग 200 उद्यमों के एसवीईपी उद्यमियों ने अपने उत्पादों की बिक्री की, जिससे उन्‍हें 6.31 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

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