दुर्गा पूजा उत्सव को दर्शाती बॉलीवुड की फिल्में

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भारत के सभी हिस्सों में दुर्गा पूजा का उत्सव शुरू हो चुका है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से दुर्गा पूजा का शुभारंभ होता है। शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि के बीच संधि पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान संधि पूजा का विशेष महत्व होता है। संधि पूजा अष्टमी के खत्म होने और नवमी के लगने के बाद के काल तक की जाती है। ये पूजा इतनी विशेष है तो, हमारे फिल्मकार अपनी कहानियों में इस पूजा का जिक्र कैसे न करते! जब से भारत में सिनेमा का पदार्पण हुआ है तब से अलग-अलग फिल्मकार ने अपने-अपने समय में दुर्गा पूजा को अपनी कहानियों में पिरोया है। आइये बात करते हैं उन फिल्मों की जिनमें दुर्गा पूजा कहानी का अहम हिस्सा रही।

देवदास (Devdas) 
इस फिल्म की कहानी बंगाल के परिपेक्ष पर आधारित है, जिसमें दो बंगाली परिवारों को दिखाया गया है, जो बंगाली परंपरा में रचे-बसे नज़र आते हैं। अंतरात्मा से एक हो चुके दो प्रेमियों की इस कहानी में दुर्गा पूजा को बहुत सलीके से दिखाया गया है। दुर्गा पूजा इस कहानी में एक महत्वपूण स्थान रखती है। शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म को संजय लीला भंसाली ने निर्देशित किया है। इस फिल्म में शाहरूख देवदास बने हैं, पारो के किरदान में एश्वर्या राय है, जबकि चन्द्रमुखी के रोल में माधुरी दीक्षित हैं।

परिणीता (Parineeta)
इस फिल्म में प्रेम और घृणा को प्रमुखता से दिखाया गया है। साथ ही दिखाई देती है दुर्गा पूजा की भव्यता और उसके इर्द-गिर्द घूमती खूबसूरत कहानी। इस फिल्म में दुर्गा पूजा से जुड़ी सभी चीजों का बहुत अच्छे से फिल्माया गया है। यह फिल्म शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के एक बंगाली उपन्यास पर आधारित है। विद्या बालन ने इस फिल्म से डेब्यू किया था। इस फिल्म में उनके साथ संजय दत्त और सैफ अली खान मेन रोल में हैं।

कहानी (Kahaani) 
इस सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म में विद्या बालन मुख्य किरदार में है। दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में अपने गुमशुदा पति को ढूंढती एक गर्भवती महिला की कहानी पर आधारित है ये फिल्म। फिल्म में कोलकाता और दुर्गा पूजा बहुत महत्वपूर्ण थीम है। एक महिला की शक्ति को देवी दुर्गा की शक्ति के रूप में दर्शाने की बहुत खूबसूरत कोशिश करती है ये फिल्म। 

दमन (Daman)
यह फिल्म मुख्य रूप से शादी के बाद महिलाओं पर हो रही हिंसा पर आधारित है। इस फिल्म में रवीना टंडन मुख्य किरदार में नज़र आयेंगी। देवी दुर्गा से प्रेरणा लेते हुए इस फिल्म की नायिका ‘दुर्गा’ भी विजय दशमी के दिन अपने लिए इंसाफ लेती है। स्त्री शक्ति को दिखाती ये फिल्म एक मजबूत सामाजिक संदेश देती है।

पाथेर पांचाली (Pather Panchali)
भारतीय सिनेमा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली और क्लासिक की श्रेणी में गिने जानी वाली इस फिल्म की कहानी में भी दुर्गा पूजा का प्रमुख स्थान दिया गया है। विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय द्वारा लिखित उपन्यास पर आधारित इस फिल्म को सत्यजीत रे ने निर्देशित किया है। यह फिल्म दुर्गा पूजा में अप्पू और उसकी बड़ी बहन दुर्गा की परेशानियों को दर्शाती है और उनके आने वाले सुनहरे कल का संकेत देती है।

देवीपक्ष (Debipaksha)
राजा सेन द्वारा निर्देशित यह बंगाली फिल्म हेमंती (रितुपर्णा सेनगुप्ता) की कहानी पर आधारित है, जो यौन शोषण का शिकार होने के बाद उस अपराधी के खिलाफ उठ खड़ी होती है और उसको उसके अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेती है। देवी पक्ष में भी दुर्गा पूजा का त्यौहार मनाया जाता है।

अंतरमहल (AntarMahal)
फिल्म की कहानी एक उम्रदराज जमींदार (जैकी श्रॉफ), उसकी दो पत्नियों (रूपा गांगुली और सोहा अली खान) और एक कुम्हार (अभिषेक बच्चन) के जीवन को दर्शाती है। कुम्हार को रानी विक्टोरिया के रूप में दुर्गा की मूर्ति बनाने का काम दिया जाता है। ये फिल्म धर्म की आड़ में कुप्रथा और उत्पीड़न की कहानी कहती है। ये ताराशंकर बंधोपाध्याय की लघु कहानी ‘प्रोतिमा’ पर आधारित है और रितुपर्णो घोष द्वारा निर्देशित है। 

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