दिल्ली विश्वविद्यालय में एडहॉक टीचर्स का अनिश्चितकालीन धरना जारी

दिल्ली विश्वविद्यालय

लाट साहब ब्यूरो

(डीयू कैम्पस)9 जनवरी दिल्ली विश्वविद्यालय नार्थ कैम्पस स्थित स्थानीय कला संकाय के मुख्य द्वार पर, दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न काॅलेजों में पढ़ा रहे एडहाॅक टीचर्स के सम्मिलित तत्वाधान में अनिश्चितकालीन धरने प्रदर्शन एवं भूख हड़ताल का आयोजन किया। यह धरना विश्वविद्यालय में एडहाॅक टीचर्स के खिलाफ चल रही उदासीनता के खिलाफ किया जा रहा है। इस धरने के पहले दिन दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ(डूटा) अध्यक्ष डा. राजीव रे, भूतपूर्व डूटा अध्यक्ष डा. आदित्य नारायण मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शिक्षक इकाई NDTF के पूर्व अध्यक्ष डा. ए के भागी व डीयू विद्युत परिषद और कार्यकारी परिषद के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे। चूंकि डीयू के विद्युत परिषद और कार्यकारी परिषद की तैयारियां कैम्पस में जोरों पर है, तो वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में कार्यरत अलग-2 संगठनों के पदाधिकारियों ने इस धरने में शिरकत की।

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वहीं भूख हड़ताल के आयोजक एडहाॅक टीचर्स में से एक टीचर ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन एडहाॅक टीचर्स द्वारा किया जा रहा है, और हमने ना तो डूटा अध्यक्ष और ना ही किसी किसी शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया था। वो लोग अपनी मर्जी से मंच पर बैठे थे। इस अपनी परेशानियों और मांगों को लेकर एडहाॅक टीचर्स ने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। 
लगातार कई वर्षों के शोषण उत्पीड़न के बाद आज एडहाॅक टीचर्स अपने सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। पहले से रोजगार की लड़ाई तो लड़ ही रहे हैं। अब लगता है एडहाॅक टीचर्स को अपना हक पाने के लिए आरपार की निर्णायक लड़ाई लड़नी ही पड़ेगी। -डा. रंजन कुमारअसिस्टेंट प्रोफेसर, हिन्दी विभागज़ाकिर हुसैन काॅलेज 

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हम एडहॉक शिक्षक सरकारी नीतियों, डीयू प्रशासन की जिद्द से तंग आ चुके हैं।अब एक ही विकल्प है कि प्रधानमंत्री संसद से पारित कर एक ही साथ हम सभी एडहॉक शिक्षकों का समायोजन करें।-आंदोलनरत एडहाॅक टीचर 
आपको पता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के 4500 एडहॉक शिक्षक कैसी जिंदगी जी रहे हैं?उनका हर स्तर पर शोषण और अपमान हो रहा है।महिला-एडहॉक शिक्षिका के गर्भधारण के दरम्यान होने वाली परेशानियों को देख इस सिस्टम पर गुस्सा आता है।
-आंदोलनरत एडहाॅक टीचर 

डीयू के भीतर खुलेआम यूजीसी ,कोर्ट और निकायों के डिसिजन की धज्जियां उड़ाई जा रही है। सरकार चुप हैं? उसने विश्वविद्यलयों के भीतर आदेश जारी कर नियुक्तियाँ रुकवाई हुई है,क्यों?
-आंदोलनरत एडहाॅक टीचर

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