ग्वालियर मेले को जरुरी था टैक्स छूट का बूस्टर डोज

ग्वालियर मेले

-विवेक कुमार पाठक-

113 साल पुराने ग्वालियर व्यापार मेले को आखिरकार नयी सरकार से बूस्टर डोज मिल गया। कभी 500 करोड़ के टर्न ओवर के साथ पूरे देश में प्रसिद्ध रहा ग्वालियर व्यापार मेला लुड़कते लुड़कते 100 करोड़ के टर्न ओवर पर जा पहुंचा था ऐसे में पूर्व केन्द्रीय मंत्री और गुना शिवपुरी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर व्यापार मेले को टैक्स छूट में सहूलियत दिलाई है वो काबिले कौर है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सांसद सिंधिया के लिखे पत्र पर ग्वालियर व्यापार मेले में रोड टैक्स में 50 फीसदी छूट दे दी है। इस छूट के कारण एक बार फिर से ग्वालियर मेले में ऑटोमोबाइल सेक्टर फिर से गुलजार होने जा रहा है। बरसों पुरानी मांग स्वीकृत होने से शहर के ऑटोमोबाइल कारोबारियों में खुशी की लहर है।

ग्वालियर व्यापार मेले की घटती रौनक को फिर से कायम करने की दिशा में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस प्रयास को पूरे ग्वालियर अंचल में सराहा जा रहा है। लोग एक बार फिर ग्वालियर मेले के पुराने वैभव का जिक्र करते नजर आ रहे हैं। ग्वालियर मेले की छूट से वाहन खरीदने वाले शहरवासियों से लेकर प्रदेश के तमाम शहरों के लोगों की यादेंं निश्चित ही फिर से ताजा होंगी जब मेले में कई सालों बाद दुपहिया और चारपहिया वाहन बड़े बड़े स्टॉल से बिकते दिखेंगे। मेले में रोड टैक्स की छूट के कारण ग्वालियर मेले से बरसों तक वाहन खरीदने का पूरे अंचल में क्रेज रहा है। पिछले कई सालों से ऑटोमोबाइल सेक्टर न लगने के कारण मेले की चमक धमक हर साल घटती जा रही थी। हालत ये ही कि दो दशक पहले जो मेला 500 करोड़ के टर्न ओवर पर कारोबार का आंकड़ा छू जाता था वह अब घटते घटते 100 करोड़ के कारोबार तक भी बमुश्किल पहुंच पा रहा है। ग्वालियर मेले को प्रदेश में नयी सरकार बनने के बाद मिली सौगात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इसके लिए गुना शिवपुरी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की व्यक्तिगत रुचि और कारण जगजाहिर हैं।

ग्वालियर ही नहीं अंचल और मप्र के करोड़ों लोग जानते है कि 113 साल पहले पशु मेले के रुप में यह मेला सांसद सिंधिया के ही पूर्वजों ने ग्वालियर में शुरु कराया था। मेला लगाने का मकसद तत्कालीन ग्वालियर रियासत में व्यापार और कारोबार को बेहतर वातावरण बनाकर उद्यमियों को एक सामूहिक मंच देना था। तब ग्वालियर से मालवा सहित मध्य भारत के बड़े हिस्से में फैली रियासत के कारण ग्वालियर मेले में अंचल के व्यापारियों का आगमन निरंतर बढ़ता गया। स्वतंत्रता के बाद से भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहीं राजमाता विजयाराजे सिंधिया हों या उनके बेटे पूर्व केन्द्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर मेले की रौनक को मजबूत सियासी कद के कारण कम नहीं होने दिया। भाजपा हो या कांग्रेस सरकार हर सत्ता में ग्वालियर व्यापार मेला की रौनक और चमक धमक बढ़ती चली गई मगर मगर कांग्रेस में शीर्ष पर राजनीति कर रहे माधवराव सिंधिया के असामायिक के बाद से ग्वालियर मेला नेपथ्य में आना शुरु हुआ। मेले का नामाकरण जरुर माधवराव सिंधिया के नाम पर जरुर किया गया मगर सिंधिया की तरह मेला विस्तार के प्रति व्यक्तिगत रुचि आमतौर पर नहीं दिखी।

सिंधिया परिवार के लगाए इस मेले में आकर्षण का केन्द्र सरकारी छूट भी बीच के सालों में बंद हो गई जिसके बाद ऑटोमोबाइल कारोबारी भी बिदक गए और मेले में ऑटोमोबाइल सेक्टर लगना बंद हो गया।

बीच बीच में हर साल मेले के लिए व्यापारी सरकार से छूट की मांग करते रहे हैं मगर तमाम कारणों से छूट की घोषणा हो नहीं पाई। खैर नया साल ग्वालियर मेले के लिए नयी उम्मीद लेकर आया है।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के रुप में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिस कदर कांग्रेस के लिए नींबू मिर्ची की माला पहनकर गांव गांव और शहर शहर अग्रेसिव कैम्पेन किया साथ ही प्रदेश भर में जीत के साथ ग्वालियर चंबल में कांग्रेस ने बीजेपी का जो सफाया किया है उसने सिंधिया का मध्यप्रदेश में राजनैतिक कद अंग्रिम पंक्ति में कर दिया है। वे मुख्यमंत्री भले न बन पाए हों मगर चुनाव से लेकर मुख्यमंत्री की दौड़ तक वे कमलनाथ की तरह फ्रंट में रहे। आज उनके प्रभाव से उनके खेमे के कई विधायक प्रदेश कैबीनेट में मंत्री हैं।

सिंधिया के प्रदेश सरकार को लिखे पत्र पर पहली फुरसत में ग्वालियर मेले को जो टैक्स छूट मिली है वो उनके बढ़ते राजनैतिक कद का उदाहरण है। मेले के उदघाटन अवसर पर उन्होंने जिस कदर ग्वालियर व्यापार मेले का पुराना वैभव फिर से स्थापित करने की हुंकार भरी है वो काबिले गौर है। हर ग्वालियर वासी चाहेगा कि सिंधिया के बताए लक्ष्य अनुसार ग्वालियर मेले का कारोबार दस गुना हो जाए। विकास के ये लक्ष्य सुखद हैं और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस दिशा में ग्वालियर मेले से कांग्रेस सरकार आने के बाद नए साल में शानदार पहल की है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है)

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